कोर्ट ने ट्रेन टीटीई के रूप में पेश होने के आरोप में वकील के खिलाफ दर्ज FIR ( First Information Report) को रद्द करने से इनकार कर दिया : मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय
2023 का आपराधिक मामला संख्या 31910, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 170, 171 और 419
के तहत आरोपों के इर्द - गिर्द घूमता है |
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ती अनुराधा शुक्ला ने अधिवक्ता रोहित कुमार मिश्रा द्वारा आपराधिक प्रकिया संहिता, 1973 की धारा 482 के तहत दायर एक याचिका को खारिजकर दिया है, जिसमे एक FIR को रद्द करने की मांग की गई थी |
विचारधीन घटना २२ जून २०२१ की है जब भोपाल रेलवे स्टेशन पर उप स्टेशन अधीक्षक के रूप में कार्यरत अखिलेश ( टीटीई) का रूप धारण करने वाले एक व्यक्ति से हुआ | कथित तौर पर टीटीई होने का दावा करने वाला यह व्यक्ति प्लेटफार्म नंबर 2 पर यात्रियों से पैसे इकट्टा कर रहा था |
इसके बाद एक मेमो बनाया गया और रोहित कुमार मिश्रा को सर्कार के द्वारा हिरासत में लिया गया,रेलवे पुलिस (GRP) ने FIR अपराध संख्या 191/2021 दर्ज की |
वकील रोहित कुमार मिश्रा ने अपने कानूनी वकील के माध्यम से दलील दी की उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है | उनके द्वारा तर्क दिया गया की वह किसी अतरिक्त किराया टिकट(EAFT) बुक का उपयोग नहीं कर रहे थे , उनके पास से जब्त की गई किताब केवल धन रसीद बुक की एक प्रति थी | साथ ही उन्होंने यात्रियों से धन वसूली या यात्रियों द्वारा किसी औपचारिक शिकायत के सम्बंध में सबूत की अनूपस्थितिपर भी ध्यान केन्द्रित किया | मिश्रा द्वारा आगे दावा किया गया की उन्होंने कोविड महामारी के कारण अपना मानसिक संतुलन खो दिया था और वकील होने के नाते , बिना किसी विशिष्ट टीटीई वर्धि प्रतीक के केवल एक काला कोट पहने हुए रेलवे स्टेशन पर मौजूद थे |
हालाँकि , राज्य , श्रीमती द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया | विनीता शर्मा ने मिश्रा की याचिका का विरोध किया और कहा की इसमे योगता का आभाव है , तथ्यों और प्रस्तुतियो की सावधानीपूर्वक जाँच के बाद ,न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला ने पाया की उतर मध्य रेलवे की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है की जब्त की गई किताब EAFT बुक नहीं थी , लेकिन इसमे एक मोहर लगी थी जो की प्रयागराज चेकिंग यूनिट से सम्बंधित थी |
इसके अतिरिक्त अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सीसीटीवी फूटेज में मिश्रा को यात्रियों के साथ उनके टिकटो के बारे मई उलझते पाया गया गया है, जैसा की GRP द्वारा तैयार पंचनामा में उल्लेख किया गया है |अदालत ने कहा की मिश्रा से बरामद धन या टोकन की अनुउपस्थिति और दर्ज किये गए यात्रियों के बयानों की कमी जैसे मुद्दों को परिक्षण के दौरान संबोंधित किया जायेगा , अंतत: अदालत ने FIR को रद्द करने की याचिका को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया की सबूतों और बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष के मामले का आकलन करना ट्रायल कोर्ट का क्षेत्र है |



0 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें