Indian-Constitution-Chapter-3 Section 23-35 /भारतीय-संविधान-भाग-3 अनुच्छेद 23-35
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| भारतीय संविधान अनुच्छेद 23-35 |
शोषण के विरुद्ध अधिकार ( अनुच्छेद 23-24 )
अनुच्छेद 23 - बलात श्रम ( जबरदस्ती श्रम ) एवं बेरोजगारी ( बिना वेतन ) पर रोक लगाया गया | लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बलात श्रम या बेगारी कराया जा सकता है |
अनुच्छेद 24 - 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चो को खतरनाक कम में नहीं लगाया जा सकता है |
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार ( अनुच्छेद 25 - 28 )
अनुच्छेद 25 - अतः करण की चर्चा अथार्थ व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता की चर्चा है | इसके तहत सिखों को कृपाण ( तलवार ) मुस्लिमो को दाढ़ी ,हिन्दुओ को टिकी ( तिलक) रखने की स्वतंत्रता है |
यह अनुच्छेद अंतरात्मा की स्वतंत्रता और सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, अभ्यास करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है।
अनुच्छेद 26 - इसमें सामूहिक धार्मिक स्वतंत्रता है ,इसी के तहत यज्ञ,हवन,सड़क पर नमाज की अनुमति है |
1. 26 (A) धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए संस्थानों की स्थापना और रखरखाव करना।
2. 26 (B) धर्म से संबंधित मामलों में अपने मामलों का प्रबंधन करने के लिए।
3. 26 (C) चल और अचल संपत्ति का स्वामित्व और अधिग्रहण करने के लिए।
4. 26 (D) कानून के अनुसार उन संपत्तियों का प्रशासन करने के लिए।
अनुच्छेद 27 - इस अनुच्छेद में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को किसी विशेष धर्म या धार्मिक संप्रदाय के प्रचार या रखरखाव के लिए किसी भी प्रकार के करों का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
इस अनुच्छेद के तहत, कोई भी शैक्षणिक संस्थान जो पूरी तरह से राज्य के धन से संचालित होता है, उसे कोई धार्मिक निर्देश नहीं देना चाहिए।
सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार ( अनुच्छेद 29 - 30 ) | Cultural And Educational Rights(Article 29 - 30)
अनुच्छेद 29 - यह अनुच्छेद सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को उनकी विशिष्ट भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। यह इन अल्पसंख्यकों को धर्म, नस्ल, जाति या भाषा के आधार पर शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश से वंचित करने पर भी रोक लगाता है।
अनुच्छेद 30 - अपनी पसंद के शिक्षण संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों से संबंधित किसी भी संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण के मामले में, राज्य द्वारा निर्धारित प्रतिपूरक राशि उन्हें गारंटीकृत किसी भी अधिकार को प्रतिबंधित नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करते समय राज्य द्वारा अल्पसंख्यकों के शिक्षण संस्थानों के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
अनुच्छेद 31 - इसमें पैत्रक संपति के बारे में बताया गया है | जो मूल अधिकार है लेकिन 44 वा संविधान संशोधन 1978 द्वारा इसे कानूनी अधिकार बना दिया गया और अनुच्छेद 300 (क) में जोड़ दिया गया है |
नोट - अनुच्छेद 19(6) में अर्जित संपति के बारे में बताया गया है ,जबकि अनुच्छेद 31 में पैत्रक संपति के बारे में बताया गया है |
मूल अधिकार को हम से सरकार या जनता कोई नहीं छीन सकता है जबकि कानूनी अधिकार को जनता द्वारा नहीं छिना जा सकता लेकिन सरकार छीन सकती है|इसके लिए सरकार ने भूमि अधिग्रहण विधेयक जारी किया |
संवैधानिक उपचार का अधिकार | Right To Constitutional Remedies
अनुच्छेद 32 - इस अनुच्छेद के तहत, एक पीड़ित नागरिक किसी भी मौलिक अधिकार (Fundamental Rights in Hindi) को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है। यह संविधान की मूल विशेषता है। यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को पांच रिट के प्रकार जारी करने का अधिकार प्रदान करता है।
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण – यह रिट हिरासत में लिए गए व्यक्ति को सह शरीर 24 घंटे में अदालत के सामने पेश करने का आदेश देती है।
2. परमादेश – यह रिट सार्वजनिक अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करने का आदेश देती है जो कार्य करने में विफल रहते है यह उनके लिए जारी किया जाता है |
3. प्रतिषेध – यह रिट निचली अदालतों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकती है।
4. सर्टिओरिअरी (Certiorari) – यह उच्च न्यायालयों द्वारा निचली अदालतों को जारी किया जाता है, जब निचली न्यायालय अपने अधिकार का उलंघन कार फैसला सुना देती है |
5. क्वो-वारंटो (Quo-Warranto) – यह रिट किसी व्यक्ति को ऐसे सार्वजनिक पद पर रहने से रोकता है जिसका वह हकदार नहीं है।
नोट - : अम्बेडकर जी ने अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा कहा था | प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा गया है |
ये 5 प्रकार की रिट को अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट भी जरी कार सकता है |
अनुच्छेद 33 - राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में संसद ,सेना,मिडिया था गुप्तचर के मूल अधिकारों को सीमित कार सकती है |
अनुच्छेद 34 - भारत के किसी भी में सेना का कानून ( Marshal law ) लागु कार सकती है | सेना के कानून को court marshal कहा जाता है | सबसे कठोर Marshal law AFSPA है | ( Axnel Forces special Power Act )
अनुच्छेद 35 - इस अनुच्छेद के अनुसार कुछ मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने का अधिकार केवल संसद को है।
- संसद अनुच्छेद 16 के खंड (3), अनुच्छेद 32 के खंड (3), अनुच्छेद 33 और अनुच्छेद 34 के संबंध में कानून बना सकती है |
- संसद उन कृत्यों के लिए सजा निर्धारित कर सकती है जिन्हें मौलिक अधिकारों के तहत अपराध घोषित किया गया है।
- ऊपर निर्दिष्ट मामलों से संबंधित कोई भी कानून, जो संविधान के प्रारंभ के दौरान लागू होते हैं, तब तक लागू रहेंगे जब तक कि इसे संसद द्वारा परिवर्तित या निरस्त या संशोधित नहीं किया जाता है।
भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध मौलिक अधिकार | Fundamental Rights Available Only to Citizens
भारतीय संविधान के तहत, कुछ मौलिक अधिकार केवल भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं -
1. धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव के खिलाफ अधिकार ( अनुच्छेद 15 )
2. सार्वजनिक रोजगार के मामले में अवसर की समानता का अधिकार ( अनुच्छेद 16 )
3. भाषण और अभिव्यक्ति, सभा, संघ, आंदोलन, निवास और पेशे की स्वतंत्रता ( अनुच्छेद 19)
4. सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार ( अनुच्छेद 29 और 30 )
भारतीय नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों के लिए उपलब्ध मौलिक अधिकार निम्नलिखित हैं-
1. अनुच्छेद 14 :-कानून के समक्ष समानता और कानूनों का समान संरक्षण ()।
2. अनुच्छेद 20:- अपराधों के लिए सजा के संबंध में संरक्षण।
3. अनुच्छेद 21:- प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण।
4. अनुच्छेद 21क:- प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार।
5. अनुच्छेद 22:- कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत से संरक्षण।
6. अनुच्छेद 23:- मानव तस्करी और बेगारी पर रोक।
7. अनुच्छेद 24:- कारखानों आदि में बच्चों के नियोजन पर रोक।
8. अनुच्छेद 25:- अंत:करण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
9. अनुच्छेद 26:- धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता।
10. अनुच्छेद 27:- किसी भी धर्म के प्रचार के लिए करों के भुगतान से मुक्ति।
11.अनुच्छेद 28:- कुछ शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या पूजा में भाग लेने से स्वतंत्रता।
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